हरी मिर्च की खेती (Green Chilli Farming in India) – उन्नत तकनीक, किस्में, लागत, पैदावार और मंडी भाव 2025

हरी मिर्च भारत की एक प्रमुख नकदी एवं मसाला सब्जी फसल है, जिसकी मांग पूरे साल बनी रहती है।
यह सब्जी कम समय में तैयार होकर किसानों को तेज़ और नियमित आमदनी देती है।

हरी मिर्च Solanaceae (नाइटशेड) परिवार की फसल है और इसे हरी सब्जी तथा सूखी लाल मिर्च – दोनों रूपों में बेचा जाता है।

हरी मिर्च को अलग-अलग भाषाओं में क्या कहते हैं?

  • हिंदी – हरी मिर्च

  • अंग्रेज़ी – Green Chilli

  • मराठी – हिरवी मिरची

  • गुजराती – લીલા મરચાં

  • तमिल – பச்சை மிளகாய்

  • तेलुगु – పచ్చి మిర్చి

👉 हरी मिर्च का उपयोग सब्जी, अचार, चटनी, मसाला उद्योग और निर्यात में बड़े पैमाने पर होता है।


📍 भारत के प्रमुख हरी मिर्च उत्पादक राज्य

Major Green Chilli Producing States in India

  • आंध्र प्रदेश (सबसे बड़ा उत्पादक)

  • तेलंगाना

  • कर्नाटक

  • महाराष्ट्र

  • मध्य प्रदेश

  • उत्तर प्रदेश

  • बिहार

  • राजस्थान

  • तमिलनाडु

  • ओडिशा

👉 गर्म और शुष्क जलवायु वाले क्षेत्र मिर्च की खेती के लिए सबसे उपयुक्त होते हैं।


🌾 हरी मिर्च की प्रमुख किस्में – Popular Varieties

किस्म का नाम विशेषताएँ औसत पैदावार (क्विंटल/हे.)
पुसा ज्वाला तीखी, लंबी फलियाँ 200–250
पंत C-1 हरी व सूखी दोनों के लिए 180–220
अर्का मेघना रोग प्रतिरोधक 250–300
अर्का हरिता गहरे हरे रंग की मिर्च 220–260
तेजसिनी F1 हाईब्रिड, अधिक उपज 300–350
NS 1701 F1 बाजार में लोकप्रिय 320–380

☀️ जलवायु और मिट्टी – Climate & Soil Requirement

🌤️ जलवायु

  • गर्म और हल्की आर्द्र जलवायु उपयुक्त

  • अत्यधिक ठंड और पाला नुकसानदायक

उपयुक्त तापमान:

  • 20°C से 30°C

🌱 मिट्टी

  • दोमट व बलुई-दोमट मिट्टी सर्वोत्तम

  • जल निकासी अच्छी हो

  • pH मान: 6.0 – 7.5


🚜 खेत की तैयारी – Field Preparation

  • खेत की 2–3 गहरी जुताई करें

  • अंतिम जुताई में 20–25 टन सड़ी गोबर खाद/हेक्टेयर मिलाएँ

  • मेड़ व नालियों की सही व्यवस्था करें

  • रोपाई से पहले खेत समतल करें


🌱 नर्सरी व रोपाई – Nursery & Transplanting

बीज की मात्रा

  • 1–1.5 किलोग्राम बीज/हेक्टेयर

नर्सरी तैयारी

  • 25–30 दिन में पौधे रोपाई योग्य

  • बीज को थिरम/कार्बेन्डाजिम 2 ग्राम/किलो से उपचार करें

रोपाई का समय

  • खरीफ: जून–जुलाई

  • रबी: अक्टूबर–नवंबर

  • गर्मी: जनवरी–फरवरी

दूरी

  • कतार से कतार: 45 सेमी

  • पौधे से पौधे: 45 सेमी


🌿 उर्वरक प्रबंधन – Fertilizer Management

पोषक तत्व मात्रा (किग्रा/हे.) उपयोग समय
नाइट्रोजन (N) 120 3 भागों में
फास्फोरस (P₂O₅) 60 रोपाई समय
पोटाश (K₂O) 60 फूल व फल समय

👉 सूक्ष्म तत्व (जिंक, बोरॉन) देने से फलन बढ़ता है।


💧 सिंचाई प्रबंधन – Irrigation Management

  • रोपाई के तुरंत बाद हल्की सिंचाई

  • गर्मी में 5–6 दिन पर

  • सर्दी में 8–10 दिन पर

  • फूल व फल बनने के समय नमी आवश्यक

👉 ड्रिप सिंचाई से 25–30% उत्पादन बढ़ता है।


🐛 रोग एवं कीट प्रबंधन – Disease & Pest Control

प्रमुख रोग

रोग लक्षण नियंत्रण
मोजेक वायरस पत्तियाँ सिकुड़ना रोगग्रस्त पौधे हटाएँ
फल सड़न फलों पर काले धब्बे कार्बेन्डाजिम
डाई-बैक टहनी सूखना कॉपर ऑक्सी क्लोराइड

प्रमुख कीट

  • थ्रिप्स

  • एफिड

  • फल छेदक कीट

👉 नियंत्रण हेतु नीम तेल 5% या इमिडाक्लोप्रिड का प्रयोग करें।


🍃 तुड़ाई और पैदावार – Harvesting & Yield

  • रोपाई के 60–70 दिन बाद तुड़ाई शुरू

  • 7–10 दिन के अंतर पर तुड़ाई

  • हरी अवस्था में तुड़ाई सर्वोत्तम

औसत पैदावार:

  • 200–350 क्विंटल प्रति हेक्टेयर

  • उन्नत हाईब्रिड से 400 क्विंटल/हे. तक


📊 हरी मिर्च मंडी भाव 2025 – Green Chilli Market Price

राज्य औसत भाव (₹/क्विंटल) उच्चतम
आंध्र प्रदेश 2500 5000
महाराष्ट्र 2800 5500
कर्नाटक 2600 5200
उत्तर प्रदेश 2400 4800
बिहार 2300 4500

👉 खुदरा बाजार में ₹40–100 प्रति किलो (मौसम अनुसार)।


💰 लागत और मुनाफा – Cost & Profit Analysis

विवरण खर्च (₹/हे.)
बीज 6,000
नर्सरी व रोपाई 8,000
खाद व उर्वरक 12,000
दवा 6,000
सिंचाई व मजदूरी 15,000
कुल लागत ₹45,000–50,000

👉 औसत आय:
300 क्विंटल × ₹3,000 = ₹9,00,000
👉 शुद्ध मुनाफा: ₹8,00,000 प्रति हेक्टेयर तक


🧬 आधुनिक तकनीकें – Advanced Techniques

  • ड्रिप सिंचाई + मल्चिंग

  • हाईब्रिड बीजों का उपयोग

  • नेट हाउस में खेती

  • जैविक हरी मिर्च उत्पादन


🥗 हरी मिर्च का पोषण मूल्य – Nutritional Value (100 ग्राम)

पोषक तत्व मात्रा
कैलोरी 40 kcal
विटामिन C 240 मि.ग्रा
विटामिन A 952 IU
फाइबर 1.5 ग्राम
आयरन 1.2 मि.ग्रा

👉 हरी मिर्च रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है और पाचन में सहायक है।


🏁 निष्कर्ष – Conclusion

हरी मिर्च की खेती किसानों के लिए कम समय में अधिक लाभ देने वाली बेहतरीन सब्जी फसल है।
उन्नत किस्में, सही पोषण और आधुनिक सिंचाई अपनाकर किसान प्रति हेक्टेयर लाखों रुपये कमा सकते हैं।

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