केले की खेती और मंडी भाव 2025

केला (Banana) भारत की प्रमुख बागवानी फसलों में से एक है, जिसे “गरीबों का सेब” भी कहा जाता है। यह एक सालभर उपलब्ध रहने वाला फल है, जो पोषक तत्वों, फाइबर और खनिजों से भरपूर होता है। भारत विश्व में केले का सबसे बड़ा उत्पादक देश है और यहाँ यह न केवल घरेलू खपत बल्कि निर्यात के लिए भी उगाया जाता है। केले की खेती से किसानों को अच्छा नकदी लाभ मिलता है क्योंकि इसकी मांग पूरे साल बनी रहती है।


प्रमुख केले की किस्में – Banana Varieties

भारत में केले की कई किस्में उगाई जाती हैं, जिनमें से प्रमुख हैं:

  • ग्रांड नैन (Grand Naine) – ऊँची पैदावार और बेहतर फल गुणवत्ता।

  • रोबस्टा (Robusta) – मीठा स्वाद और बाजार में अच्छी मांग।

  • ड्वार्फ कैवेंडिश (Dwarf Cavendish) – छोटे आकार का पौधा, तेज़ पैदावार।

  • राजापुरी (Rajapuri) – रोग प्रतिरोधी और लम्बे समय तक टिकने वाले फल।

  • नेंदरन (Nendran) – खासतौर पर प्रोसेसिंग और चिप्स बनाने के लिए।


जलवायु और मिट्टी – Climate and Soil

  • जलवायु – केला गर्म और आर्द्र जलवायु में अच्छी तरह उगता है। 20°C से 35°C तापमान सबसे उपयुक्त है।

  • वर्षा – 100 से 150 सेमी वार्षिक वर्षा आदर्श मानी जाती है।

  • मिट्टी – दोमट, बलुई-दोमट और जल निकासी वाली उपजाऊ मिट्टी बेहतर रहती है। मिट्टी का pH 6.5 से 7.5 के बीच होना चाहिए।


खेत की तैयारी और पौधरोपण – Field Preparation and Planting

  1. खेत को 2-3 बार जुताई करके भुरभुरा कर लें।

  2. गोबर की खाद या कंपोस्ट डालकर मिट्टी की उर्वरता बढ़ाएँ।

  3. पौधरोपण का समय जून-जुलाई (मानसून) और फरवरी-मार्च (सिंचाई उपलब्ध क्षेत्र) में उपयुक्त है।

  4. पौधरोपण दूरी – 1.8 मीटर × 1.5 मीटर रखी जाती है।

  5. प्रति हेक्टेयर लगभग 1200-1500 पौधे लगाए जाते हैं।


उर्वरक और सिंचाई प्रबंधन – Fertilizer and Irrigation

  • गोबर की खाद – 20-25 टन प्रति हेक्टेयर।

  • रासायनिक उर्वरक – नत्रजन (N), फॉस्फोरस (P), पोटाश (K) को संतुलित मात्रा में देना चाहिए।

  • सिंचाई – केले को नियमित पानी की आवश्यकता होती है। 7-10 दिन के अंतराल पर सिंचाई करें।

  • ड्रिप इरिगेशन (Drip Irrigation) से पानी की बचत और पैदावार दोनों बढ़ती है।


रोग एवं कीट प्रबंधन – Disease and Pest Control

  • पनामा विल्ट (Panama Wilt) – फफूंदनाशी दवा का प्रयोग करें।

  • सिगाटोका लीफ स्पॉट (Sigatoka Leaf Spot) – पत्तियों पर दाग दिखते ही छिड़काव करें।

  • रूट वेविल (Root Weevil) – जैविक नियंत्रण और मिट्टी उपचार से रोकथाम करें।

  • स्वस्थ पौध सामग्री और सही फसल प्रबंधन से रोगों को कम किया जा सकता है।


पैदावार और कटाई – Yield and Harvesting

  • पौधारोपण के 11-12 महीने बाद फल तैयार होते हैं।

  • अच्छी खेती से 40-50 टन प्रति हेक्टेयर पैदावार मिल सकती है।

  • केले के गुच्छों को सावधानी से काटकर बाजार या प्रोसेसिंग यूनिट में भेजें।


केले का व्यापार और मंडी भाव 2025 – Banana Market Price

भारत के प्रमुख केले उत्पादक राज्य – महाराष्ट्र, तमिलनाडु, गुजरात, आंध्र प्रदेश, बिहार और उत्तर प्रदेश हैं।

  • मंडी भाव

    • थोक बाजार में केले की कीमत ₹800 से ₹1500 प्रति क्विंटल के बीच रहती है (गुणवत्ता और सीजन के अनुसार)।

    • खुदरा बाजार में दर ₹20 से ₹40 प्रति किलो तक पहुँच सकती है।

  • निर्यात – भारत से मध्य पूर्व और यूरोपीय देशों को केले का निर्यात भी होता है।


लागत और मुनाफा – Cost and Profit

  • प्रति हेक्टेयर केले की खेती में कुल लागत लगभग ₹1.5 से ₹2 लाख आती है।

  • औसतन ₹3 से ₹4 लाख प्रति हेक्टेयर तक का शुद्ध लाभ संभव है।

  • ड्रिप इरिगेशन, जैविक खाद और उच्च गुणवत्ता वाले पौधों से मुनाफा और भी बढ़ सकता है।


निष्कर्ष – Conclusion

केले की खेती किसानों के लिए एक लाभकारी व्यवसाय है। उच्च पैदावार देने वाली किस्में, आधुनिक तकनीक, संतुलित खाद, नियमित सिंचाई और रोग नियंत्रण अपनाकर किसान बेहतर उत्पादन और मुनाफा कमा सकते हैं। मंडी भाव स्थिर होने और मांग लगातार बढ़ने के कारण केला खेती हमेशा फायदेमंद मानी जाती है।

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