आम (Mango) भारत का राष्ट्रीय फल है और इसे “फलों का राजा” कहा जाता है। भारत आम उत्पादन में विश्व में पहले स्थान पर है। इसकी खेती लगभग सभी राज्यों में होती है, लेकिन प्रमुख उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और गुजरात हैं। आम घरेलू खपत के साथ-साथ निर्यात के लिए भी अत्यंत लाभकारी नकदी फसल (Cash Crop) है।
आम की प्रमुख किस्में – Popular Varieties of Mango
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दशहरी (Dasheri) – उत्तर प्रदेश और उत्तर भारत में लोकप्रिय, मीठा स्वाद।
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लंगड़ा (Langra) – बनारस क्षेत्र की प्रसिद्ध किस्म, फाइबर रहित गूदा।
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अल्फांसो (Alphonso) – महाराष्ट्र की प्रीमियम किस्म, निर्यात में सर्वाधिक मांग।
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केसर (Kesar) – गुजरात में उगाई जाने वाली सुगंधित किस्म।
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तोतापुरी (Totapuri) – दक्षिण भारत की प्रोसेसिंग के लिए उपयुक्त किस्म।
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चौसा और मालदा (Chausa, Malda) – उत्तरी भारत की अन्य लोकप्रिय किस्में।
भूमि और जलवायु – Soil and Climate
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आम की खेती के लिए उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय जलवायु उपयुक्त है।
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तापमान 24°C से 30°C आदर्श है।
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अच्छी जल निकासी वाली दोमट या बलुई दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त।
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pH 6.5 से 7.5 के बीच होना चाहिए।
खेती की तैयारी – Field Preparation
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खेत की गहरी जुताई कर मिट्टी को भुरभुरी करें।
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गड्ढों का आकार 1 मीटर × 1 मीटर × 1 मीटर रखें और 10–15 किलो गोबर की खाद डालें।
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पौधारोपण से पहले गड्ढों को धूप में 15–20 दिन खुला छोड़ें।
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गड्ढों में कीटाणुनाशक का प्रयोग करें।
पौधारोपण और सिंचाई – Planting and Irrigation
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रोपाई का समय – बरसात की शुरुआत (जून–जुलाई) या वसंत ऋतु (फरवरी–मार्च)।
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पौधों की दूरी – 9 मीटर × 9 मीटर (साधारण) या हाई डेंसिटी प्लांटेशन के लिए 4 मीटर × 2 मीटर।
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आम के बाग को शुरुआती वर्षों में नियमित सिंचाई दें – गर्मियों में 7–10 दिन के अंतराल पर।
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ड्रिप सिंचाई से पानी की बचत होती है और पौधों को संतुलित नमी मिलती है।
उर्वरक प्रबंधन – Fertilizer Management
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प्रति पौधा प्रति वर्ष औसतन:
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नाइट्रोजन (N): 500–1000 ग्राम
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फास्फोरस (P): 200–250 ग्राम
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पोटाश (K): 300–500 ग्राम
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इसके अलावा जिंक, बोरोन और आयरन जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व संतुलित मात्रा में डालना जरूरी है।
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10–15 किलो जैविक खाद या गोबर की खाद प्रति पौधा भी आवश्यक।
रोग और कीट प्रबंधन – Disease and Pest Management
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फूल झुलसा रोग (Powdery Mildew) – गंधक का छिड़काव लाभकारी।
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एन्थ्रेक्नोज (Anthracnose) – कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का छिड़काव करें।
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फल मक्खी और थ्रिप्स – कीटनाशक का समय पर प्रयोग।
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बाग की नियमित निराई-गुड़ाई और गिरे हुए फलों की सफाई रोग नियंत्रण में मदद करती है।
पैदावार और कटाई – Yield and Harvesting
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आम के पौधे आमतौर पर 4–5 वर्ष बाद फल देना शुरू करते हैं।
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पारंपरिक बाग में औसत पैदावार 8–10 टन प्रति हेक्टेयर, जबकि हाई डेंसिटी प्लांटेशन में 15–20 टन प्रति हेक्टेयर तक उपज संभव है।
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फल की कटाई कच्चे लेकिन परिपक्व अवस्था में करनी चाहिए ताकि परिवहन के दौरान नुकसान कम हो।
मंडी भाव और व्यापार – Mango Price and Market Trends
2025 में आम का औसत भाव:
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स्थानीय मंडी – ₹20 – ₹50 प्रति किलो (किस्म और गुणवत्ता पर निर्भर)।
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थोक बाजार – ₹2000 – ₹5000 प्रति क्विंटल।
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निर्यात मूल्य – अल्फांसो और केसर जैसी प्रीमियम किस्में अंतरराष्ट्रीय बाजार में उच्च दाम प्राप्त करती हैं।
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आम से जूस, पल्प, प्यूरी, जैम, स्क्वैश और ड्राय स्लाइस बनाकर प्रोसेसिंग यूनिट से अतिरिक्त लाभ लिया जा सकता है।
लागत और मुनाफा – Cost and Profit
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खेती की लागत (पहले 3 साल): लगभग ₹2.5 – ₹3 लाख प्रति हेक्टेयर।
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आय (फलन शुरू होने के बाद): ₹4 – ₹6 लाख प्रति हेक्टेयर (सामान्य उत्पादन में)।
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शुद्ध लाभ: ₹1.5 – ₹3 लाख प्रति हेक्टेयर, जबकि निर्यात-योग्य आम की पैदावार पर यह लाभ कई गुना हो सकता है।
निष्कर्ष – Conclusion
आम की खेती लंबे समय तक फल देने वाली और लाभकारी फसल है। हाई डेंसिटी प्लांटेशन, ड्रिप सिंचाई, संतुलित उर्वरक प्रबंधन और रोग नियंत्रण से उत्पादन और गुणवत्ता दोनों ही बेहतर बनाए जा सकते हैं। यदि किसान प्रोसेसिंग और निर्यात पर ध्यान दें तो आम की खेती से बहुत अधिक आय प्राप्त की जा सकती है।